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Tuesday, April 16, 2024

डेंगू : सरकारी अस्पतालों में इलाज महंगा हो गया, एक डोनर प्लेटलेट की बढ़ी मांग, इतना खर्च होगा

सिंगल डोनर प्लेटलेट्स की मांग रांडम डोनर प्लेटलेट्स से अधिक है। प्लेटलेट्स को एक डोनर से जंबो पैक बनाने के लिए एक किट का उपयोग किया जाता है। सरकारी अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिए जंबो पैक की लागत भी बढ़ गई है।

डेंगू मरीजों को प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में एक डोनर प्लेटलेट, जिसे ज़ंबो पैक कहा जाता है, के लिए नौ हजार रुपये देने पड़ रहे हैं। निजी अस्पतालों में मरीजों से 12 हजार रुपये लिए जाते हैं। डेंगू के मामले बढ़ने से एक डोनर प्लेटलेट की मांग बढ़ी है। आयुष्मान कार्ड पर भर्ती मरीजों को यह सेवा निःशुल्क दी जाती है।

डेंगू के 24 मरीज प्रदेश के पांच जिलों देहरादून, नैनीताल, हरिद्वार, पौड़ी और चमोली में मिले हैं। मैदानी जिलों में डेंगू मरीजों की संख्या लगातार बढ़ने से प्लेटलेट्स की मांग भी बढ़ गई है। सिंगल डोनर प्लेटलेट्स की मांग रांडम डोनर प्लेटलेट्स से अधिक है। प्लेटलेट्स को एक डोनर से जंबो पैक बनाने के लिए एक किट का उपयोग किया जाता है। सरकारी अस्पताल में भर्ती मरीज को जंबो पैक के लिए नौ हजार रुपये देने की प्रथा है। जबकि निजी अस्पताल में 12 हजार है।

गंभीरता से संक्रमित मरीजों को प्लेटलेट्स चढ़ाने की आवश्यकता होती है। सिंगल डोनर प्लेटलेट्स या जंबो पैक सामान्य प्लेटलेट्स यूनिट से अधिक प्रभावी हैं। एक जंबो पैक पांच से छह प्लेटलेट्स की कमी पूरी करता है। जो जंबो पैक की मांग को बढ़ाता है। लेकिन एक गरीब व्यक्ति को ९० हजार रुपये जुटाना असंभव है। स्वास्थ्य कर्मियों का कहना है कि आयुष्मान कार्ड पर भर्ती मरीजों को निशुल्क चिकित्सा मिलती है।

जंबो पैक की आठ घंटे की सुविधा का लाभ

हरिद्वार ब्लड बैंक में मरीजों को जंबो पैक केवल आठ घंटे ही मिल पा रहे हैं। एफरेसिस मशीन का संचालन अलग से नहीं किया जाता है। ब्लड बैंक में एफरेसिस मशीन तो दी गई, लेकिन स्टॉफ नहीं मिला। एफरेसिस मशीन को शिफ्ट में चलाने के लिए एक डॉक्टर, स्टॉफ नर्स और मेडिकल टेक्नीशियन की आवश्यकता होती है। मशीन को 24 घंटे के लिए तीन शिफ्टों में तीन चिकित्सक, तीन स्टॉफ नर्स और तीन मेडिकल टेक्नीशियन उपलब्ध होने पर ही चलाया जा सकता है। स्टॉफ नहीं होने के कारण सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक जंबो पैक बनाया जा सकता है। जंबो पैक केवल इमरजेंसी में बनाने के लिए एक चिकित्सक को लगाया गया है।

स्टॉफ की कमी के चलते एफरेसिस मशीन आठ घंटे चल रही है। इमरजेंसी में मशीन को जिला अस्पताल के चिकित्सक की उपस्थिति में चलाया जाता है। सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजों के लिए जंबो पैक का शुल्क नौ हजार रुपये है, जबकि निजी अस्पतालों में भर्ती मरीजों का शुल्क बारह हजार रुपये है। जरूरतमंद मरीजों को अस्पताल प्रशासन जंबो पैक मुफ्त देता है। —पैथोलॉजिस्ट डॉ. रविंद्र चौहान, ब्लड बैंक के प्रभारी

दून ब्लड बैंक में प्लेटलेट्स

सरकारी अस्पतालों को दून मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक से प्लेटलेट्स खरीदने की आवश्यकता है। वहीं, कोरोनेशन अस्पताल में ब्लड बैंक नहीं होने के कारण प्लेटलेट्स नहीं मिल पाते हैं। दून अस्पताल में प्रतिदिन दस से बारह मरीजों को प्लेटलेट्स की जरूरत होती है जो अस्पताल में भर्ती हैं। वहीं, दसवीं से बारह निजी अस्पतालों से भी मरीज प्लेटलेट्स पर आ रहे हैं। दून अस्पताल के ब्लड बैंक की इंचार्ज डॉ. शशि उप्रेती ने बताया कि आयुष्मान मरीजों के लिए एक डोनर प्लेटलेट फ्री है और अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिए नौ हजार रुपये का खर्च आता है। यदि निजी अस्पताल के मरीज एक डोनर प्लेटलेट लेने आते हैं, तो 12000 रुपये की लागत होगी।

रैंडम और एक डोनर प्लेटलेट्स क्या होते?

डॉ. नेहा बत्रा, दून अस्पताल के ब्लड बैंक की एसोसिएट प्रोफेसर, ने बताया कि सिंगल डोनर प्लेटलेट्स प्रक्रिया में लोग प्लेटलेट्स लेकर आते हैं। डोनर के ब्लड से प्लेटलेट्स निकालकर उपलब्ध कराया जाता है। इसके लिए सेम ग्रुप का सहयोग आवश्यक है। वहीं, दूसरी प्रक्रिया में जो लोग ब्लड बैंक में रक्तदान देते हैं इनके रक्त से प्लेटलेट्स निकाले जाते हैं। रैंडम डोनर प्लेटलेट्स विधि है। एकमात्र डोनर छह से आठ रैंडम डोनर के बराबर है। इसमें एक बार में चार यूनिट प्लेटलेट्स हो सकते हैं।

 

अस्पताल या ब्लड बैंक सिंगल डोनर प्लेटलेट्स रैंडम डोनर प्लेटलेट्स

दून अस्पताल –             भर्ती के लिए                   9000 रुपये आयुष्मान के लिए निशुल्क

निजी अस्पताल             12000                                     300

– सिटी ब्लड बैंक             उपलब्ध नहीं                          1000

– आईएमए ब्लड बैंक            12000                              1000

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